शेयर बाजार में हर दिन निवेशकों के मन में एक ही सवाल होता है—आज बाजार ऊपर जाएगा या नीचे?
स्टॉक मार्केट की चाल किसी एक कारण से तय नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कई घरेलू और वैश्विक फैक्टर एक साथ काम करते हैं।
हम यहां विस्तार से उन 10 सबसे महत्वपूर्ण बातों को समझा रहे हैं, जो हर दिन stock market action यानी बाजार की दिशा और मूवमेंट को तय करती हैं। यह विश्लेषण निवेशकों, ट्रेडर्स और मार्केट को समझने वालों के लिए बेहद उपयोगी है।
Table of Contents
1. ग्लोबल मार्केट्स का संकेत
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत से पहले अमेरिकी, एशियाई और यूरोपीय बाजारों की चाल पर सबसे ज्यादा नजर रहती है।
- Dow Jones
- Nasdaq
- S&P 500
- Nikkei
- Hang Seng
इन इंडेक्स की मजबूती या कमजोरी से यह संकेत मिलता है कि आज भारतीय बाजार में ओपनिंग कैसी रह सकती है।
अगर ग्लोबल मार्केट्स में तेजी है, तो घरेलू बाजार में सकारात्मक शुरुआत की संभावना बढ़ जाती है।
2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व और ब्याज दरें
US Federal Reserve के फैसले पूरी दुनिया के बाजारों को प्रभावित करते हैं।
- ब्याज दरों में बढ़ोतरी
- ब्याज दरों में कटौती
- फेड चेयरमैन के बयान
इन सभी का असर सीधे FIIs, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और इक्विटी मार्केट पर पड़ता है।
जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक रिस्क से दूर जाते हैं और शेयर बाजार दबाव में आ सकता है।
3. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें
भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। इसलिए Crude Oil Prices का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ता है।
- तेल महंगा → महंगाई बढ़ने का खतरा
- तेल सस्ता → बाजार के लिए राहत
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल तेजी से ऊपर जाता है, तो स्टॉक मार्केट पर नकारात्मक दबाव बन सकता है।
4. डॉलर बनाम रुपया (USD-INR Movement)
रुपये की स्थिति शेयर बाजार के लिए बेहद अहम संकेतक है।
- रुपया कमजोर → विदेशी निवेशकों की चिंता
- रुपया मजबूत → बाजार के लिए सकारात्मक संकेत
जब डॉलर मजबूत होता है और रुपया गिरता है, तो FIIs पैसे निकाल सकते हैं, जिससे बाजार पर दबाव बनता है।
5. विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) और DII की गतिविधि
हर दिन बाजार की चाल तय करने में FIIs और DIIs की खरीद-बिक्री अहम भूमिका निभाती है।
- FIIs की भारी खरीद → बाजार में तेजी
- FIIs की बिकवाली → बाजार में गिरावट
अक्सर देखा गया है कि FII फ्लो ही बाजार की दिशा तय करता है, खासकर शॉर्ट टर्म में।
6. घरेलू आर्थिक आंकड़े
भारत से जुड़े आर्थिक डेटा भी बाजार की दिशा को प्रभावित करते हैं, जैसे:
- महंगाई दर (CPI, WPI)
- औद्योगिक उत्पादन (IIP)
- GDP ग्रोथ
- मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस PMI
अगर आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं, तो बाजार में भरोसा बढ़ता है और तेजी देखने को मिलती है।
7. कॉरपोरेट नतीजे (Earnings Results)
कंपनियों के तिमाही नतीजे शेयर बाजार की चाल का मजबूत आधार होते हैं।
- बड़े बैंक
- IT कंपनियां
- FMCG सेक्टर
- ऑटो और मेटल कंपनियां
अगर नतीजे बाजार की उम्मीद से बेहतर होते हैं, तो संबंधित सेक्टर और इंडेक्स में तेजी आती है।
खराब नतीजे पूरे बाजार का मूड खराब कर सकते हैं।
8. सेक्टोरल ट्रेंड्स और रोटेशन
हर दिन बाजार में सभी सेक्टर एक जैसा प्रदर्शन नहीं करते।
- कभी बैंकिंग मजबूत
- कभी IT दबाव में
- कभी मेटल चमकता है
- कभी FMCG सुरक्षित विकल्प बनता है
सेक्टर रोटेशन से यह तय होता है कि पैसा किस दिशा में जा रहा है और कौन सा सेक्टर लीड कर सकता है।
9. भू-राजनीतिक घटनाएं (Geopolitical Events)
दुनिया में होने वाली बड़ी घटनाएं भी बाजार को झटका दे सकती हैं, जैसे:
- युद्ध या तनाव
- प्रतिबंध (Sanctions)
- अंतरराष्ट्रीय समझौते
- राजनीतिक अस्थिरता
ऐसी घटनाओं में निवेशक सेफ हेवन की ओर जाते हैं और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है।
10. टेक्निकल फैक्टर्स और बाजार का मूड
शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग में टेक्निकल लेवल्स बेहद अहम होते हैं।
- सपोर्ट और रेजिस्टेंस
- F&O डेटा
- ओपन इंटरेस्ट
- पुट-कॉल रेशियो
- इंडिया VIX
इन संकेतों से यह अंदाजा लगाया जाता है कि बाजार ओवरबॉट है या ओवरसोल्ड, और अगला मूव किस दिशा में हो सकता है।
निवेशकों के लिए रणनीति
इन सभी फैक्टर्स को समझने के बाद निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे:
- घबराकर फैसले न लें
- लॉन्ग टर्म सोच रखें
- क्वालिटी शेयरों पर ध्यान दें
- बाजार के शोर से दूर रहें
स्टॉक मार्केट में डिसिप्लिन और जानकारी सबसे बड़ी ताकत होती है।
आज का बाजार कैसे तय होता है
शेयर बाजार की चाल किसी एक खबर या फैक्टर से तय नहीं होती। यह हमेशा ग्लोबल संकेत, घरेलू आंकड़े, निवेशकों की भावना और तकनीकी स्तरों के मेल से बनती है।
जो निवेशक इन 10 अहम बातों को रोजाना ध्यान में रखते हैं, वे बाजार को बेहतर समझ पाते हैं और सही समय पर बेहतर फैसले ले सकते हैं।



